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kalki bhagwan kon hai

 कल्कि भगवान विष्णु के दसवें और अंतिम अवतार माने जाते हैं। हिंदू पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, इनका अवतरण कलियुग के अंत और सतयुग के प्रारंभ के संधिकाल में होगा। जब पृथ्वी पर पाप और अधर्म अपनी चरम सीमा पर पहुँच जाएगा, तब कल्कि अवतार दुष्टों का संहार करके धर्म की पुनर्स्थापना करेंगे और नए युग (सतयुग) का आरंभ करेंगे।


श्रीमद्भागवत तथा कल्कि पुराण जैसे वैष्णव शास्त्रों में भगवान कल्कि के बारे में विस्तृत जानकारी दी गई है जिसके अनुसार उनके मातापिता विष्णुयश तथा सुमति, गुरु भगवान परशुराम, मित्र हनुमानजी, वाहन देवदत्त घोड़ा, अस्त्र नारायणी तलवार तथा धर्मपत्नी माता लक्ष्मी की अवतार देवी पद्मावती होंगी।


पापियों का संहार करने में हनुमानजी सहित सात चिरंजीवी उनकी सहायता करेंगे। सभी 64 कला धारक कल्कि अवतार में कृष्णावतार से भी ज्यादा ऐश्वर्य और शक्ति होगी। कल्कि अवतार को भविष्य का अवतार माना जाता है, जो अंधकार के युग (कलियुग) को समाप्त कर सत्य,मानवता तथा धर्म की रक्षा कर (सतयुग) की शुरुआत करेंगे।


दन्तकथाएँ


धार्मिक एवं पौराणिक मान्यता के अनुसार जब पृथ्वी पर पाप बहुत अधिक बढ़ जाएगा। तब दुष्टों के संहार के लिए विष्णु का यह अवतार यानी ‘कल्कि अवतार’ प्रकट होगा। कल्कि को विष्णु का भावी और अंतिम अवतार माना गया है। भगवान का यह अवतार " निष्कलंक भगवान " के नाम से भी जाना जायेगा। आपको ये जानकर आश्चर्य होगा की भगवान श्री कल्कि ६४ कलाओं के पूर्ण निष्कलंक अवतार होंगे


शास्त्रों के अनुसार यह अवतार भविष्य में होने वाला है। कलियुग के अन्त में जब शासकों का अन्याय बढ़ जायेगा। चारों तरफ पाप बढ़ जायेंगे तथा अत्याचार का बोलबाला होगा तब इस जगत का कल्याण करने के लिए भगवान विष्णु कल्कि के रूप में अवतार लेंगे।


श्रीमद्भागवत पुराण और भविष्यपुराण में कलियुग के अंत का वर्णन मिलता है. कलियुग में भगवान कल्कि का अवतार होगा, जो पापियों का संहार करके फिर से सतयुग की स्थापना करेंगे. कलियुग के अंत और कल्कि अवतार के संबंध में अन्य पुराणों में भी इसका वर्णन मिलता है.


युग परिवर्तनकारी भगवान श्री कल्कि के अवतार का प्रयोजन विश्वकल्याण बताया गया है। श्रीमद्भागवतमहापुराण में विष्णु के अवतारों की कथाएं विस्तार से वर्णित है। इसके बारहवें स्कन्ध के द्वितीय अध्याय में भगवान के कल्कि अवतार की कथा विस्तार से दी गई है जिसमें यह कहा गया है कि "सम्भल ग्राम (नगरी) में विष्णुयश नामक श्रेष्ठ ब्राह्मण के पुत्र के रूप में भगवान कल्कि का जन्म होगा। वह देवदत्त नामक घोड़े पर आरूढ़ होकर अपनी कराल करवाल (तलवार) से दुष्टों ,पापियों , म्लेच्छों[5] का संहार करेंगे तभी सतयुग का प्रारम्भ होगा।"


श्रीमद्भागवत-महापुराण के 12वे स्कंद के अनुसार-


सम्भलग्राममुख्यस्य ब्राह्मणस्य महात्मनः।


भवने विष्णुयशसः कल्किः प्रादुर्भविष्यति।।


अर्थ- शम्भल ग्राम में विष्णुयश नाम के एक ब्राह्मण होंगे। उनका ह्रदय बड़ा उदार और भगवतभक्ति पूर्ण होगा। उन्हीं के घर कल्कि भगवान अवतार ग्रहण करेंगे।


कल्कि पुराण की इनफार्मेशन अगले ब्लॉग में तब तक के स्वस्थ रहे मस्त रहे | 

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